सोसाइटी के निर्देश

पवनसुत क्रेडिट को ऑपरेटिव सोसाइटी एक संपूर्ण नगर निगम सीमा ग्वालियर में सोसाइटी के रूप में सहकारिता विभाग द्वारा पंजीकृत है

पवनसुत क्रेडिट को ऑपरेटिव सोसाइटी पूर्ण मजबूती के साथ सहकारिताके सिद्धांतों एवं सहकारिता अधिनियम 1960 का पालन करती है

पवनसुत क्रेडिट को ऑपरेटिव सोसाइटी आम जनता या गैर सदस्यों सेकिसी भी प्रकार का बैंकिंग व्यवसाय नहीं करती

सहकारी सोसायटी अधिनियम 1960 के क्रमांक (17 सन 1961) की धारा 7 के तहत नियम अनुसार कोई भी संस्था जो इस नियम में रजिस्टर्ड हो अपने सदस्यों के मध्य वित्तीय लेनदेन कर सकती है, पवनसुत क्रेडिट को ऑपरेटिव सोसाइटी भी इसी नियम के अंतर्गत केवल अपने सदस्यों केबीच वित्तीय लेनदेन करती है

बैंकिंग रेगुलेशन एक्ट 1949 धारा 5 सी ( बी ) अनुसार बैंकिग की परिभाषा आम जनता से जमाए स्वीकार करना एवं चेक ड्राफ्ट आदि की वित्तीयसुविधा प्रदान करना है जो पवनसुत क्रेडिट को ऑपरेटिव सोसाइटी द्वारा नहीं की जाती

बैंक विनियमन अधिनियम 1949 की धारा 5 के अंतर्गतप्रा थमिक साख समिति जिनका प्रमुख व्यवसाय करना है तथा जिनकी चुकता शेयर पूंजी एवं आरक्षित निधि एक लाख से कम है वे भारतीय रिजर्व बैंक से लाइसेंस प्राप्त किए बिना अपने सदस्यों के मध्य बैंकिंग कारोबार कर सकती है (सहकारी समितियों पर यथा प्रयोज्य )

पवनसुत क्रेडिट को ऑपरेटिव सोसाइटी कोई व्यक्तिगत संस्था नहीं है ना ही वह किसी भी व्यक्ति के स्वामित्व में है बल्कि एक पुरी गणतांत्रिक संस्था है जो निर्देशक मंडल द्वारा संचालित है जिन का चुना व सोसायटी के सदस्यों के द्वारा सोसाइटी की आम बैठक में होता है

सोसाइटी जो आयकर अधिनियम 1961 की धारा 80पी के तहत अपने सदस्यों को ऋण देकर ब्याज के रूप में होने वाली आय आयकर से मुक्त है

आयकर अधिनियम 1961 के अनुसार नियमित सदस्यों को सोसाइटी से ब्याज के द्वारा होने वाली आय पर टीडीएस में कटौती नहीं होती !

उपविधि क्रमांक 3 के तहत सोसाइटी के उद्देश्य मैं संस्था के सदस्यों की आर्थिक सामाजि क उन्नति करने का है !

उपविधि क्रमांक 4 के द्वारा संस्था द्वारा सदस्यों की मांग के अनुसार उचित मूल्य पर घरेलू एवं जीवन उपयोगी उपभोक्ता वस्तुओं को उनके निवास पर उपलब्ध करा ने की सेवा प्रदान करेगी , सोसायटी अधिनियम 1960 उपविधिक्रमां क 4 के अनुसार सदस्यों के मनोरंजन खेलकूद बौद्धिक एवं शारीरिक विकास से संबंधित सेवाएं तथा सुविधाएं प्रदान करना है !

उपविधि क्रमांक 5 के अनुसार ना ममात्र के सदस्य धारा 19 में संस्था किसी भी व्यक्ति को नाम मात्र के सदस्य के रूप में प्रवेश दे सकेगी लेकिन सोसाइटी के प्रबंध में या उसके लाभों में कोई अंश नहीं होगा !

उपविधि क्रमांक (2)के अनुसार किसी भी सदस्य को अपनी सदस्यता राशि या हित किसी अन्य के हस्तांतरि त करने का अधिकार नहीं होगा !